पवित्र ५२८ हर्ट्ज सिंगिंग बाउल ध्वनि, मोबाइल हैप्टिक कंपन और १०८ रुद्राक्ष मनकों के साथ दिव्य मंत्रों का जाप करें और दैनिक साधना टोकन पुरस्कार अर्जित करें।
शांत मन और स्थिरता के साथ प्रभु आराधना का अनुकूल समय।
सचेत वैदिक संकल्प के साथ किया गया जप आत्मबल एवं आध्यात्मिक फल को कई गुना बढ़ाता है
१०८ मनकों के कई चक्रों (मालाओं) का संचयी रिकॉर्ड रखें
आपकी वर्तमान ग्रह दशा के अनुसार वैदिक उपचारात्मक मंत्र
ज्ञान, विवेक, वैवाहिक सुख, संतान लाभ और ईश्वरीय कृपा प्राप्ति।
कुंडली दोषों के निवारण हेतु शास्त्रोक्त जप संख्या कोटा
विवाह में विलंब, वैवाहिक कलह एवं मनमुटाव का निवारण।
करियर बाधा, अत्यधिक मानसिक दबाव व आर्थिक रुकावटों से रक्षा।
अज्ञात भय, बुरे स्वप्न एवं जीवन में अचानक आने वाले संकटों से सुरक्षा।
पूर्वजों की शांति, वंश वृद्धि एवं पारिवारिक उन्नति के द्वार खोलना।
रुके हुए कार्यों की तुरंत सिद्धि, व्यापार शुरुआत एवं परीक्षा सफलता।
6 दिन शेष
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20 दिन शेष
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushti-Vardhanam | Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat ||
हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं। जैसे पका हुआ फल लता के बंधन से मुक्त होता है, वैसे ही हमें मृत्यु के भय से मुक्त कर अमरत्व प्रदान करें।
केंद्रीय चक्र को स्पर्श करें अथवा स्पेसबार दबाएं। मोबाइल पर सूक्ष्म कंपन वास्तविक रुद्राक्ष मनके को अंगूठे से आगे खिसकाने का अनुभव कराता है।
प्रत्येक मनके पर ५२८ हर्ट्ज की दिव्य घंटी बजती है। १०८वें जाप पर मेरु मनके का शिखर पूर्ण होने पर ४३२ हर्ट्ज का भव्य मंदिर शंख/घंटा बजता है।
नेत्र बंद कर ध्यानमग्न होने हेतु निर्देशित ऑटो-जाप (२.५ से. या ४ से.) चालू करें, डिजिटल माला स्वतः तालबद्ध जाप कराती रहेगी।
प्रतिदिन कम से कम एक १०८ की माला पूर्ण करके स्ट्रीक बनाएं। लगातार ७ दिन पर ५ टोकन तथा २१ दिन की साधना पर २५ मुफ्त टोकन पाएं।
ज्योतिष में १२ राशियां और ९ संचालक ग्रह होते हैं। १२ × ९ = १०८, जो मानव अस्तित्व के संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा चक्र का प्रतिनिधित्व करता है।
आकाश मंडल २७ नक्षत्रों में विभाजित है, प्रत्येक के ४ चरण (पाद) होते हैं। २७ × ४ = १०८, जो आत्मा की चेतना के १०८ सोपानों को दर्शाते हैं।
माला का १०९वाँ मनका मेरु (गुरु) मनका कहलाता है। परंपरा अनुसार मेरु मनके को लांघा नहीं जाता, अपितु माला को घुमाकर पुनः जाप किया जाता है।
हमारे २४/७ एआई पंडित जी से अपनी चल रही विंशोत्तरी महादशा के अनुसार अनुकूल बीज मंत्र अथवा रत्न का परामर्श प्राप्त करें।