आज, कल या किसी भी चुनी हुई तिथि के लिए मांगलिक, कालसर्प, शनि साढ़े साती, गंडमूल / सत्ताईसा, ग्रहण, गुरु चांडाल, केमद्रुम, पितृ व विष योग सहित सभी 9 शास्त्रीय वैदिक दोषों और योगों का प्रामाणिक परिहार (भंग) नियमों और वैदिक उपायों के साथ तुरंत सटीक विश्लेषण प्राप्त करें।
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वैदिक ज्योतिष में जन्म के समय की ग्रह स्थितियां व्यक्ति के मानसिक स्वभाव, संबंधों, आजीविका और कर्मों को गहराई से प्रभावित करती हैं। पारंपरिक ज्योतिष में प्रायः एक-एक दोष के लिए अलग-अलग शुल्क या टोकन मांगे जाते हैं।
ज्योतिपायलट के यूनिवर्सल दोष कैलकुलेटर का मुख्य उद्देश्य सभी 9+ प्रमुख दोषों और योगों का पारदर्शी व एकमुश्त विश्लेषण उपलब्ध कराना है। ज्योतिष ज्ञान को जन-जन तक सुलभ बनाने के लिए यह सुविधा बिना किसी टोकन, शुल्क या रजिस्ट्रेशन के पूर्णतः निःशुल्क रखी गई है।
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बृहत्पाराशर होराशास्त्र के अनुसार सटीक भंग व अपवाद नियमों का समावेश।
स्थायी जन्म कुंडली दोषों और तात्कालिक गोचर (जैसे साढ़े साती) में स्पष्ट भेद।
प्रत्येक दोष के लिए मंत्र जप, दान, अनुष्ठान और जीवनशैली संबंधी मार्गदर्शन।
सटीक पंचांग व खगोलीय गणित के आधार पर प्रत्येक योग की गणना की जाती है।
चंद्रमा का केतु (अश्विनी, मघा, मूल) या बुध (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) के नक्षत्रों में स्थित होना।
जल और अग्नि राशियों के संधि स्थल (गंडांत) का सूक्ष्म परीक्षण व 27वें दिन सत्ताईसा शांति की आवश्यकता का निर्धारण।
जन्म के 27वें दिन मूल शांति पूजा, श्री गणेश व भगवान विष्णु की आराधना तथा मूंग दाल का दान।
चंद्र राशि से 12वें, 1st और 2nd भाव में शनि का 7.5 वर्षों तक चलने वाला गोचर।
आद्य (प्रथम), मध्य (शिखर) और अन्त्य (तृतीय) चरण तथा कंटक/अष्टम ढैया का सटीक निर्धारण।
प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ, शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक और काले तिल का दान।
जब सभी सातों ग्रह राहु और केतु के अक्ष के मध्य आ जाते हैं।
पूर्ण व आंशिक कालसर्प तथा अनंत, कुलिक, वासुकि आदि 12 प्रकारों का सूक्ष्म फलादेश।
महामृत्युंजय मंत्र का नित्य जप, प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर कच्चा दूध व जल अर्पण तथा नाग पूजन।
लग्न या चंद्र से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में मंगल की स्थिति।
वैवाहिक सामंजस्य का विश्लेषण और 15 से अधिक पराशरी भंग नियमों द्वारा दोषमुक्ति का परीक्षण।
मंगल बीज मंत्र जप, मंगलवार को सुंदरकांड पाठ तथा आवश्यकतानुसार कुंभ विवाह विधान।
सूर्य अथवा चंद्रमा की राहु या केतु के साथ युति।
आत्मविश्वास, पिता के सुख (सूर्य) अथवा मानसिक शांति व माता के स्वास्थ्य (चंद्र) पर प्रभाव का आकलन।
सूर्य हेतु आदित्य हृदय स्तोत्र एवं चंद्र हेतु शिव पंचाक्षर स्तोत्र व चांदी का दान।
देवगुरु बृहस्पति की राहु अथवा केतु के साथ युति।
ज्ञान, विवेक, गुरुजनों के सम्मान और नैतिक निर्णय क्षमता पर प्रभाव का विश्लेषण।
गुरु बीज मंत्र का जप, गुरुवार को हल्दी व चने की दाल का दान तथा शिक्षकों का सम्मान।
चंद्रमा के आगे (2nd) और पीछे (12th) भाव में कोई शुभ ग्रह न होना।
मानसिक एकाकीपन व वित्तीय उतार-चढ़ाव की पहचान तथा केंद्र में ग्रहों द्वारा भंग राजयोग का आकलन।
पूर्णिमा का व्रत, चांदी का छल्ला धारण करना, श्री सूक्तम का पाठ व शिवलिंग पर दूध अर्पण।
सूर्य, नवम भाव अथवा नवमेश का राहु, केतु या शनि द्वारा दूषित होना।
पारिवारिक बाधाओं, वंश वृद्धि में विलंब व पूर्वजों के असंतुष्ट कर्म ऋण का ज्ञान।
अमावस्या को पितृ तर्पण, कौओं, गायों व मछलियों को भोजन तथा पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म।
शनि और चंद्रमा की युति अथवा परस्पर पूर्ण दृष्टि संबंध।
मानसिक अवसाद, चिंता और आध्यात्मिक वैराग्य के समय का सही आकलन।
प्रतिदिन ॐ नमः शिवाय का जप, सोमवार को रुद्राभिषेक तथा गहरे काले वस्त्रों से परहेज।
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अपनी जन्मतिथि, जन्म समय और शहर दर्ज करें। किसी घटना की जांच के लिए घटना का समय चुनें।
वर्तमान में चल रही शनि साढ़े साती या गोचर प्रभावों की तुलना हेतु तिथि B को सक्रिय करें।
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